Thursday, February 5, 2026
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वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाने हेतु संबंधित विभाग और संगठन बेहतर समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें: वित्त सचिव


देहरादून। भारतीय रिजर्व बैंक की राज्य स्तरीय समन्वय समिति की वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम से संबंधित उप-समिति की बैठक वित्त सचिव दिलीप जावलकर की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड सचिवालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए संबंधित विभाग और संगठन बेहतर समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। राज्य में वित्तीय एवं साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक तथा पुलिस विभाग द्वारा कारगर प्रयास किए जांय। उन्होंने मोबाइल एप के माध्यम से होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए पुलिस विभाग को तकनीकी उपाय विकसित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में राज्य में वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम हेतु विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा कर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में बताया गया कि राज्य में वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम हेतु एस.टी.एफ. के अंतर्गत एक फाईनेंसियल फ्रॉड यूनिट का गठन किया गया है। सचिव जावलकर ने इस यूनिट में साइबर विशेषज्ञों के साथ-साथ बैंकिंग एवं वितीय संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में साइबर अपराधों की रोकथाम हेतु यह सुझाव दिया गया कि पुलिस कमांड सेंटर में साइबर क्राइम इकाई एवं बैंक प्रतिनिधि संयुक्त रूप से कार्य करें। जिससे वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में धन की शीघ्र रिकवरी संभव हो सके और धोखेबाजों द्वारा धन निकासी पर तुरंत प्रभावी रोक लगाई जा सके। बैठक में बताया गया कि हरियाणा में इस मॉडल को अपनाने से बैंकिंग चैनलों के अतिरिक्त माध्यमों से धन अंतरण में उल्लेखनीय कमी आई है।
बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में वर्तमान में कुल 281 कंपनियाँ कार्यरत हैं, जिनका सत्यापन संबंधित नियामक संस्थाओं द्वारा किया जाता है। तय किया गया कि आम जनता को जागरूक करने एवं वितीय धोखाधड़ी से सावधान रहने हेतु इन कंपनियों की सूची को राज्य एवं जिला स्तर की सरकारी वेबसाइटों पर अपलोड किया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा की गई धोखाधड़ी के मामलों में राज्य में 14 एफ.आई.आर. दर्ज की गई हैं। इन मामलों को सी.बी.आई. को अंतरित कर दिया गया है।
अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम-2019 के तहत आम जनता को वितीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए केन्द्र सरकार के द्वारा संचालित बीयूडीएस रजिस्ट्री (BUDS Registry) पोर्टल पर देश में कार्यरत विनियमित एवं अविनियमित जमा योजनाओं व संस्थाओं का विवरण, उनकी प्रकृति तथा कार्यक्षेत्र से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कराई जाती है। जिसके बारे में जनजागरूकता बढाए जाने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में संयुक्त सचिव गृह गजेन्द्र सिंह, भारतीय रिजर्व बैंक की महाप्रबंधक नीता बेहरामफ्राम, अपर निबंधक सहकारिता ईरा उप्रेती, पुलिस उपाधीक्षक अपराध अनुसंधान विभाग नीरज सेमवाल, सहायक पुलिस अधीक्षक एसटीएफ कुश मिश्रा, बैंकिंग सलाहकार ( वित्त) नरेन्द्र कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

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