Saturday, June 6, 2026
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तीसरी संतान का खुलासा पड़ा भारी: जिला पंचायत सदस्य कुन्दन राम अयोग्य घोषित, पंचायत राजनीति में मचा भूचाल


बागेश्वर। उत्तराखण्ड की पंचायत राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र-04 असों से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य कुन्दन राम को तीन जीवित जैविक संतानें होने के आधार पर सदस्य पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी आर.सी. तिवारी द्वारा जारी इस आदेश ने न केवल जिले की राजनीतिक फिजा को गर्म कर दिया है, बल्कि पंचायतीराज संस्थाओं में निर्धारित पात्रता मानकों के अनुपालन को लेकर प्रशासन की सख्ती का भी स्पष्ट संदेश दिया है।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब विभिन्न शिकायतों के माध्यम से आरोप लगाए गए कि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान कुन्दन राम ने अपनी तीसरी जीवित जैविक संतान से संबंधित तथ्य छिपाए थे। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए निदेशक पंचायतीराज, उत्तराखण्ड के निर्देश पर मामले की विस्तृत जांच कराई गई। इसके लिए गठित तीन सदस्यीय जांच समिति में परियोजना निदेशक (डीआरडीए), जिला पंचायतराज अधिकारी तथा खण्ड विकास अधिकारी, बागेश्वर को शामिल किया गया।
जांच समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पोषण ट्रैकर एप, टीकाकरण पंजिकाओं, टेक होम राशन (टीएचआर) अभिलेखों, गोदनामा दस्तावेजों सहित विभिन्न सरकारी अभिलेखों और दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया। जांच के दौरान ऐसे कई प्रमाण सामने आए, जिन्होंने शिकायतों को पुष्ट कर दिया। समिति को प्राप्त अभिलेखों से स्पष्ट हुआ कि कुन्दन राम की तीन जीवित जैविक संतानें हैं। विशेष रूप से 6 सितम्बर 2025 को पंजीकृत गोदनामे में स्वयं उनके द्वारा तीन जीवित जैविक संतानें होने का उल्लेख किया गया था। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में भी तीसरी संतान के जन्म और उसके पोषण संबंधी विवरण दर्ज पाए गए। इतना ही नहीं, जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर कुन्दन राम ने लिखित रूप से तीसरी संतान के जन्म की पुष्टि भी की।
उत्तराखण्ड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की धारा 90(1)(द) के तहत दो से अधिक जीवित जैविक संतान रखने वाला व्यक्ति जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अयोग्य माना जाता है। इसी प्रावधान के आलोक में उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और जांच समिति की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद विहित प्राधिकारी ने कुन्दन राम को जिला पंचायत सदस्य पद हेतु अयोग्य घोषित करने का निर्णय सुनाया।
प्रशासन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और विधिसम्मत तरीके से संपन्न की गई। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया तथा प्रत्येक तथ्य और अभिलेख का गंभीरतापूर्वक परीक्षण किया गया। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को पंचायतीराज संस्थाओं में जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। नियमानुसार कुन्दन राम को आदेश प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर कुमाऊँ मंडल के मण्डलायुक्त के समक्ष अपील करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस फैसले को उच्च स्तर पर चुनौती दी जाएगी या फिर यह आदेश पंचायत राजनीति में एक नई मिसाल बनकर उभरेगा। बागेश्वर की राजनीति में इस फैसले ने फिलहाल चर्चा और बहस का नया केंद्र बना दिया है।

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