Monday, January 19, 2026
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मकर संक्रांति पर्व पर गंगा में लगाई आस्था की डुबकी


ऋषिकेश। तीर्थनगरी में मकर संक्रांति पर्व पर कडाके की ठंड के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ ही पितरों को तर्पण दिया। इस दौरान भिक्षुओं, गरीबों और ब्राह्मणों को अनाज, दाल और दक्षिणा आदि दान भेंटकर पुण्य कमाया। मकर संक्राति को लेकर मंगलवार की आधी रात के बाद से ही तीर्थनगरी के विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। ब्रह्ममुहूर्त से ही गंगा में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं के जुटने का सिलसिला तेज हो गया। श्रद्धालुओं ने त्रिवेणीघाट, बहत्तर सीढ़ी घाट, मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम, तपोवन के विभिन्न घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई। मकर संक्रांति पर्व पर गढ़वाल के साथ ऋषिकेश के श्यामपुर, भट्टोवाला, डोईवाला, रायवाला, ढालवाला, मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम, टिहरी, पौड़ी, नरेंद्रनगर आदि क्षेत्रों से लोग अपनी-अपनी कुल देवी को दर्शन कराने पहुंचे। पारंपरिक ढोल दमाऊं के साथ देवडोलियों ने स्नान किया। मकर संक्रांति स्नान पर्व की शुरुआत घने कोहरे और ठंड के बीच हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे। ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं दिखा। तड़के से गंगा के सभी घाटों पर लोग स्नान दान और पूजा करते देखे गए। घाटों पर तैनात रही जल पुलिस तीर्थनगरी में मकर सक्रांति पर्व पर ऋषिकेश, मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला आदि इलाकों में तैनात जल पुलिस के जवान गंगा घाटों और तटों पर मुस्तैद नजर आए। हालांकि स्नान के दौरान किसी अप्रिय घटना घटित होने की कोई सूचना नहीं है। इस दौरान जल पुलिस के जवानों को स्नान पर्व पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे। संक्रांति और एकादशी का फलदायी संयोग ज्योतिषाचार्य डॉ. कैलाश घिल्डियाल के अनुसार सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण में आना और एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इस वर्ष संक्रांति और एकादशी का शुभ फलदायी संयोग बना है। इस विशेष मुहूर्त में स्नान को शास्त्रों में शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य देना और दान करना लाभकारी होता है। सुबह स्नान कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष फलदायी होता है।

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