देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित वादों के निस्तारण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और बिना ठोस कारण के किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए। जिले में वर्तमान में 15,540 राजस्व वाद निस्तारण के लिए लंबित पाए गए हैं।
ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों, न्यायालयों से संबंधित प्रकरणों तथा शासन स्तर से संदर्भित मामलों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों को मामलों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।
3 से 5 वर्ष पुराने 82 मामले
समीक्षा में उप जिलाधिकारी और तहसीलदार न्यायालयों में धारा 166/167 के तहत 3 से 5 वर्ष पुराने 82 वाद लंबित पाए गए। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए इन मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने मामलों के लिए अलग से प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर नियमित समीक्षा करने को कहा।
धारा 229बी के तहत भी 841 वाद लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने इन मामलों का न्यायालयवार और विभागवार परीक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वहीं धारा 176 के तहत अगस्त माह में 13 मामलों का निस्तारण हुआ, जबकि अभी 1,157 वाद लंबित हैं। इनमें 3 से 5 वर्ष पुराने 179 मामले भी शामिल हैं। अधिकारियों को इन मामलों पर विशेष ध्यान देने और अगली समीक्षा बैठक में अद्यतन रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने को कहा गया।
निर्विवाद विरासतन मामलों का होगा तेजी से निस्तारण
जिलाधिकारी ने निर्विवाद विरासतन मामलों को युद्धस्तर पर निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में किसी प्रकार का विवाद नहीं है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। ऐसे प्रकरणों का नियमानुसार त्वरित परीक्षण कर निस्तारण किया जाए, ताकि लोगों को राजस्व कार्यालयों और न्यायालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
सॉफ्टवेयर से होगी हर मामले की निगरानी
बैठक में जिलाधिकारी ने लंबित वादों की निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। प्रस्तावित व्यवस्था में प्रत्येक मामले की वर्तमान स्थिति, लंबित रहने का कारण, संबंधित अधिकारी और निस्तारण की निर्धारित समयसीमा जैसी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी।
इससे अधिकारियों को यह पता चल सकेगा कि कौन-सा मामला कितने समय से लंबित है और उसके निस्तारण में देरी का कारण क्या है। जिलाधिकारी ने इसे व्यवस्थित मैनेजमेंट सिस्टम के रूप में विकसित करने को कहा, ताकि मामलों की नियमित निगरानी के साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सके।
न्यायालय और शासन के मामलों की भी होगी मॉनिटरिंग
जिलाधिकारी ने न्यायालयों में लंबित मामलों में विभागों द्वारा किए जाने वाले अनुपालन की अद्यतन स्थिति तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि न्यायालयों के आदेशों के अनुपालन की नियमित निगरानी की जाए और संबंधित विभागों से समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
इसी प्रकार मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर से संदर्भित मामलों में की गई कार्रवाई और अनुपालन की स्थिति को भी व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व केके मिश्रा, एडीएम प्रशासन स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी समेत संबंधित एसडीएम, विधि अधिकारी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश, 15,540 मामले लंबित
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