Tuesday, September 22, 2026
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लोक संस्कृति के संरक्षण में योगदान के लिए डॉ. डीआर पुरोहित को मिला ‘राज्य वाद्ययंत्र सम्मान’


देहरादून। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लोक संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. डीआर पुरोहित को ‘राज्य वाद्ययंत्र सम्मान’ से सम्मानित किया गया। डांडी-कांठी क्लब परिवार की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने डॉ. पुरोहित को सम्मान प्रदान किया।
समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। यहां के पारंपरिक वाद्ययंत्र केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में इन पारंपरिक विधाओं को संरक्षित करना सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा।मंत्री ने कहा कि डॉ. डीआर पुरोहित ने लोक संस्कृति, लोक कला, लोक संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनके प्रयासों से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के गांवों में लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्र आज भी सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। हालांकि आधुनिकता और बदलती जीवनशैली के कारण कई पारंपरिक विधाएं धीरे-धीरे सीमित होती जा रही हैं। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए संस्थागत प्रयासों के साथ-साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
गणेश जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार लोक संस्कृति और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोक कलाओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कलाकारों, संस्कृति विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और सरकार को मिलकर काम करना होगा।
कार्यक्रम में पार्षद कमली भट्ट, डांडी-कांठी क्लब के अध्यक्ष विजय भूषण उनियाल, प्रमोद नौटियाल, गीता पुरोहित, मोहित जायसवाल और संजय नौटियाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे। समारोह में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

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