रुद्रपुर। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने नगर के मुख्य चौक पर जनसभा कर केंद्र और प्रदेश सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि शहीदों के सपनों को कुचलकर राज्य के प्राकृतिक और आर्थिक संसाधनों की खुली लूट की जा रही है। उपपा ने आगामी विधानसभा चुनाव में जनता को मजबूत राजनीतिक विकल्प देने का दावा किया। सोमवार को पत्रकारों से वार्ता में उपपा के राष्ट्रीय समन्वयक पीसी तिवारी और केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने बताया कि न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के लिए पार्टी प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक जनसंवाद कार्यक्रम चला रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन, खेती-किसानी और श्रमिकों के शोषण जैसे बुनियादी मुद्दों के बजाय नफरत की राजनीति के जरिए जनता का ध्यान भटका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था निजी हाथों में सौंपी जा रही है। मुनाफे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईएमपीसीएल को निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध करते हुए इसे राज्य के हितों के साथ खिलवाड़ बताया। नेताओं ने कहा कि राज्य गठन के ढाई दशक बाद भी हिमालयी राज्य की मूल परिकल्पना साकार नहीं हो सकी है। पहाड़ से तराई तक युवा रोजगार की तलाश में पलायन को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि जनता लंबे समय से सख्त भू-कानून और ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ की मांग कर रही है, लेकिन सरकार संसाधनों की बंदरबांट में लगी है। अंकिता भंडारी और केतन हत्याकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों मामलों के असली सूत्रधार आज तक सामने नहीं आ सके हैं। क्षेत्रीय दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि एक प्रमुख क्षेत्रीय दल के सत्ताधारी दल के आगे झुकने से जनता का विश्वास टूटा है। उपपा का लक्ष्य संघर्षशील और ईमानदार ताकतों को एक मंच पर लाकर प्रदेश को नया राजनीतिक विकल्प देना है। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव जीवन चंद्र उप्रेती, नरेश नौडियाल, किरन आर्या, लालमणि, ललिता रावत, दिनेश उपाध्याय, कौशल्या, आशिफ, गिरीश आर्य समेत कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
उपपा ने सरकार पर राज्य के संसाधनों की लूट का लगाया आरोप
RELATED ARTICLES

