Friday, March 13, 2026
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योग महोत्सव: विदेशी साधकों ने जाना भारतीय योग का महत्व


ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के पांचवें दिन शुक्रवार को 80 देशों के 15 सौ योग साधकों ने योगाभ्यास किया। 35 से अधिक योगाचार्यों ने साधकों को कुंडलिनी, नाड़ी योग, आयुर्वेद, प्राणायाम, ध्यान, अष्टांग, विन्यास आदि योग क्रियाओं का अभ्यास कराया और क्रियाओं की महत्ता और लाभ की जानकारी दी। पांचवें दिन ब्रह्ममूहुर्त में 4:00 बजे कुंडलिनी साधना से योग महोत्सव की शुरुआत हुई। फिर विन्यास फ्लो, हठ योग और क्रिया योग जैसे विभिन्न गतिशील योग कक्षाएं आयोजित की गईं। प्रतिभागियों ने चक्र, मंत्र, ध्यान और संगीत सत्रों में भाग लिया, साथ ही ताल वर्कशॉप और स्वास्थ्य सत्र भी हुए। प्रातः चार बजे प्रतिभागियों ने कुण्डलिनी साधना के पश्चात ध्यान, योग और दिव्य संगीत का अनोखा संयोजन हुआ। कक्षाओं में योगाचार्य डॉ. इंदु शर्मा और अन्य योगाचार्यों ने अपनी अपनी विधाओं का अभ्यास कराया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि हठ योग एक प्राचीन भारतीय साधना पद्धति है जो आसन, प्राणायाम, और ध्यान के माध्यम से शरीर और मन को संतुलित करती है। यह योग शरीर की ऊर्जा पिंगला और इडा नाड़ी को शुद्ध कर प्राण को सुषुम्ना में प्रवाहित करता है, जिससे मानसिक शांति और शारीरिक लचीलापन प्राप्त होता है। दिन में चले योग सत्रों में योगाचार्य ईडन गोल्डमैन, डा. साध्वी भगवती सरस्वती, ईशान तिगुनायत, विश्वप्रसिद्ध योगाचार्या शिवा रे, आनंद मेहरोत्रा, तथा टॉमी रोसेन आदि ने साधकों को योग की महत्ता के बारे में बताया। मौके पर योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती, एचएस अरुण, आनंद मेहरोत्रा, डॉ. इंदु शर्मा, गंगा नन्दिनी, गायत्री योगाचार्य, स्वामी सेवानंद सरस्वती, स्वामी भक्तानन्द, योगाचार्य आध्या, आचार्य दीपक शर्मा, आचार्य संदीप शर्मा, रोहिणी मनोहर, नीरू कठपाल, डॉ. रूचि गुलाटी, मयंक भट्ट, विनोद, संध्या दीक्षित, डॉ. एन गणेश राव, डॉ. योगऋषि विश्वकेतु, राधिका नागरथ, सेंसेई संदीप देसाई, सुधांशु शर्मा, डॉ. एवी राजू, रामकुमार, डॉ. आनंद बालयोगी भवानी, आनंदी मैरी सेसिल, आशीष गिल्होत्रा, संजय मंचंदा, डॉ. निशी भट्ट, गुरमीत सिंह, डॉ. पद्मा नयनी गाधिराजु, संज हॉल, डॉ. कृष्ण पंकज नरम, अनिश रंगरेज, रुना रिजवी शिवमणि, अरिंदम चक्रवर्ती, योगेश मालवीय, कृष्णप्रिया, दुर्गेश अमोली आदि उपस्थित रहे।

योग से जागृत होती है ऊर्जा: चिदानंद: – परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि ‘योग और गंगा दोनों ही हमारे भीतर की ऊर्जा को जागृत करने का माध्यम हैं। गंगा की पवित्र धारा, जो प्राचीन काल से हमें शुद्धता और दिव्यता का संदेश देती आई है, वही हमें आत्मा की शुद्धि की ओर अग्रसर करती है। यह शरीर को शांति और ऊर्जा प्रदान करती है। योग का अभ्यास शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानने और उसे सही दिशा में लगाने की प्रेरणा देता है।

कैलाश खेर के गीतों पर नाचे साधक: परमार्थ निकेतन में शुक्रवार को प्रसिद्ध सूफी गायक पद्मश्री कैलाश खेर पहुंचे। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया। संध्याकाल में उन्होंने गंगा आरती की और अपने बैंड ‘कैलाशा’ के साथ शिव भक्ति से ओत-प्रोत गाने गाए।योग साधकों के बीच प्रस्तुतियां दी। उन्होंने जय जय केदारा.., बम लहरी.., देवों के देव… आदि भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां देकर साधकों को मंत्रमुग्ध किया।

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