Saturday, October 24, 2026
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नहीं रहे कुमाऊनी लोकगायक ‘दीवान दा’, सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर


अल्मोड़ा। कुमाऊनी लोकगीतों के सुप्रसिद्ध गायक और संस्कृति प्रेमी दीवान कनवाल ‘दीवान दा’ का बुधवार सुबह निधन हो गया। वह करीब 67 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से अल्मोड़ा सहित पूरे प्रदेश के सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यालय के खत्याड़ी गांव निवासी दीवान कनवाल पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका उपचार हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में चल रहा था और हाल ही में उनका ऑपरेशन भी हुआ था। उपचार के बाद वह कुछ दिन पहले ही अपने घर लौटे थे, लेकिन बुधवार सुबह अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। दीवान कनवाल अपने पीछे वृद्ध माता, दो विवाहित पुत्रों और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर बाद बेतालेश्वर घाट में किया गया, जहां उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। दीवान कनवाल कुमाऊनी लोकसंगीत की दुनिया का जाना-पहचाना नाम थे। उनकी मधुर और कर्णप्रिय आवाज ने लंबे समय तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया। उनके लोकप्रिय गीतों में ‘दाज्यु हमार जवाई रिषे ग्ये’, ‘आज कुछे मैत जा’, ‘कस भिड़े कुनई पंडित ज्यू कस करछा ब्या’ और ‘ह्यू भरी डाना’ जैसे कई गीत शामिल हैं, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा और आज भी गुनगुनाया जाता है। करीब 35 वर्षों से अधिक समय तक उन्होंने कुमाऊनी लोकसंस्कृति की सेवा की और अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनके निधन से कुमाऊनी लोकसंगीत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, लोक कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

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