Friday, February 20, 2026

डबल इंजन सरकार विकास के नाम पर सिर्फ निजीकरण (PPP) कर रही :आराधना मिश्रा मोना
लखनऊ, । विधानसभा सत्र के दसवें दिन आज कांग्रेस ने सदन के अंदर नौजवानों की बेरोजगारी का मुद्दा उठाया और आउटसोर्सिंग नौकरी को युवाओं के भविष्य के साथ सबसे बड़ा धोखा करार दिया,
बजट पर कांग्रेस विधान मंडल दल नेता श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने बढ़ते बजट के आकार और संख्या को सिर्फ ढोंग बताया, और कहा कि जब खर्च ही नहीं करना तो बजट बड़ा दिखाने से प्रदेश की जनता को क्या फायदा, कांग्रेस ने विधानसभा में आज कड़े तेवर दिखाते हुए बजट के आकार की संख्या को लेकर सरकार को घेरा और युवाओं की आउटसोर्सिंग नौकरी को लेकर सरकार पर तीखा निशान साधते हुए कहा कि सरकार की इच्छा शक्ति ना बजट खर्च करने की है,न युवाओं को स्थाई नौकरी देने की है । कांग्रेस पार्टी ने सदन के अंदर युवाओं को स्थाई नौकरी और सम्मानजनक वेतन देने को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग की

कांग्रेस विधान मंडल दल नेता श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने बजट पर विधानसभा में बोलते हुए कहा की बजट का आकार लगातार बढ़ता चला जा रहा है लेकिन खर्च उतना ही हो रहा है जितना 5 साल पहले हुआ करता था, तो ऐसे में बजट की संख्या बढ़ा देने से क्या फायदा ? ऐसे बजट से उस प्रदेश की जनता का कोई लाभ नहीं, इस बार 2026 – 27 वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने 9 लाख 13000 करोड़ का बजट पेश किया है, इससे पहले भी 2025- 26 में 8 लाख 8736 करोड़ का मूल बजट पेश हुआ था और शीतकालीन सत्र में 24000 करोड़ का अनुपूरक बजट यानि कुल मिलाकर 833000 करोड़ लेकिन उसमें से योजनाओं की मंजूरी सिर्फ 5 लाख 17 हजार करोड़ को मिली यानी 59.78 प्रतिशत, और राशि जारी हुई उसके सापेक्ष 4 लाख 71000 करोड़ मतलब 54.42 % प्रतिशत, और उसमें भी जनवरी तक खर्च जो हुआ वह सिर्फ 4,17,000 करोड़ 48.23 %, जिसमें फरवरी तक का खर्च भी मिला लें तो 4,28,000 करोड़ होता है मतलब 49.53 % प्रतिशत, तो बजट बड़ा कर देने से क्या फायदा ? 5 वर्षों में भाजपा सरकार ने बजट का आकार डेढ़ गुना कर दिया लेकिन खर्च उतना ही हो रहा जितना 5 साल पहले होता था, 2021-22 के वित्तीय वर्ष में 4 लाख 39000 करोड़ ही खर्च किया गया था, और 2025 26 में भी 4 लाख 28 हजार करोड़ ।
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि सरकार बजट के दांव पेंच के नाम लोगों को गुमराह रखना चाहती है यह प्रदेश की जनता- युवाओं, किसानों, आम आदमी से, इस प्रदेश के दलितों – पिछड़ों, गरीबों से धोखा है।
*श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने कहा राजस्व संग्रह भी तय लक्ष्य से काफी कम हो रहा है, जो बड़े-बड़े दावे सरकार के हैं आखरी में आकर सब छोटे हो जाते हैं,एक तरफ बजट के बड़े बड़े आंकड़े, लेकिन 2025 26 में सरकार ने विभिन्न करों से लगभग 6,66,000 / करोड़ प्राप्ति का लक्ष्य रखा था , लेकिन अनुपूरक बजट के समय तय राजस्व प्राप्तियों को अपने आप घटा दिया और लक्ष्य 5,83,000 / करोड़ कर दिया, इस बार भी 2026 – 27 वित्तीय वर्ष में राजस्व प्राप्ति लक्ष्य 7,32,000/ करोड़ रखा गया है, आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि सरकार बड़ा बजट दिखाने के लिये कमिटेड वेतन (वेतन,पेंशन, ब्याज भुगतान) को भी बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रही, सैलरी का रिवाइज बजट कम कर दिया क्योंकि योगी सरकार ने खाली पदों पर भर्ती ही नही की, यह दिखाता है कि सरकार की मंशा ही झूठ की है, ऐसे ही इस बार भी होगा कि 2026-27 के कमिटेड बजट के लिए मूल बजट का लगभग 53% (3 लाख 54 हजार करोड़) प्रस्तावित है,लेकिन जब यह आंकड़े रिवाइज होंगे तो फिर से 2025- 26 के वास्तविक आंकड़ों के बराबर ही आ जाएंगे ।
श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने प्रदेश के ऊपर बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश पर बजट के आकार से ज्यादा तो कर्ज है, कर्ज के मामले में उत्तर प्रदेश नंबर दो पर है देश में, 2020-21 में यह कर्ज 5,64,000 / करोड़ था, 2024- 25 में यह बढ़कर यह 8,46,000/ करोड़ पार कर गया आज यूपी के हर व्यक्ति पर लगभग 37,500 / का कर्ज है यह सरकार की कैसी नीति है ?
श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने नौजवानों की बेरोजगारी के मुद्दे को उठाते हुए सरकार के द्वारा युवाओं के रोजगार के प्रति कोई रुचि न दिखाने को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेज में जो पारंपरिक पाठ्यक्रम बी . ए. , बी.एस.सी., बी.कॉम., है उससे प्रतिवर्ष 50 लाख से ज्यादा छात्र पंजीकृत होते हैं और हर साल लाखों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रोजगार की तलाश में निकलते हैं, लेकिन आज प्रदेश का अधिकांश युवा कॉन्टैक्ट और आउटसोर्सिंग आधारित नौकरी करने को मजबूर हैं, जहां वेतन 8 से 10 – 12000 ही है, और पी.एफ. बहुत कम या नही, दुर्घटना बीमा जैसी सुविधा की कोई व्यवस्था नहीं, कंपनियों द्वारा नौकरी से निकाले जाने छटनी का डर बना रहता है, युवाओं में और उनके परिवारों में एक अनिश्चितता और डर का वातावरण सरकार ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से बना दिया है,
आराधना मिश्रा मोना ने सवाल करते हुए कहा कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत सरकार को हर 5 साल में मजदूरी की समीक्षा करनी होती है , पिछले 9 साल में कितनी बार समीक्षा हुई? क्या मजदूरों के हित में कोई फैसला लिया गया ? सरकार कहती है प्रदेश में भरपूर रोजगार है लेकिन सरकार के ही आंकड़े हैं वह कहते हैं कि 5978 विनिर्माण श्रमिकों को इसराइल भेजा गया, वर्तमान में 1336 निर्माण श्रमिकों को प्रशिक्षण देने के बाद विदेश इजरायल भेजने की और तैयारी चल रही है, 2600 की टेस्टिंग प्रक्रिया जारी है ।आप ही कहते हैं प्रदेश में 50 लाख करोड़ का निवेश आया है औद्योगिक इकाइयां लग रही हैं , फिर मजदूरों को बाहर क्यों भेजा जा रहा है ? यह सरासर इस प्रदेश की युवाओं के साथ धोखा और सरकार के झूठ को बेनकाब करता है ।
आराधना मिश्रा मोना ने आउटसोर्सिंग कॉरपोरेशन को लेकर सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि पिछली बार नेता सदन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा था कि आउटसोर्सिंग निगम बनेगा, जैम पोर्टल से नियुक्ति होगी न्यूनतम वेतन 16 से 20000 होगा और आरक्षण का पालन होगा, पिछले सितंबर महीने में घोषणा हुई थी, लेकिन 5 महीने बीत गए सरकार अभी तक नहीं बता पाई,इस पर क्या प्रगति हुई? 2017 से 26 तक सरकार ने लगभग 13000 रोजगार मेला लगाए, जिसमें 16 लाख लोगों को रोजगार दिया गया लेकिन प्रदेश में 45 साल में सबसे बेरोजगारी को सेवायोजन पोर्टल के आंकड़े बयां करते हैं, जहां 20 लाख से अधिक नौकरी पाने को लोग पंजीकृत हैं ,सरकार बताएं कि जिन लोगों को रोजगार मिला वह कहां अभी कार्यरत हैं ? बेरोजगारी दर दो-तीन प्रतिशत होने का दावा सच्चाई सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी (CMIE) की रिपोर्ट कहती है कि 2022 में 29 लाख 72,000 युवा प्रदेश में रोजगार ढूंढते ढूंढते थक गए कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी, सरकार युवाओं को धोखा ना दे स्थाई रोजगार, सम्मानजनक वेतन, और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए तुरंत ठोस नीति बनाए और जो रिक्त नौकरियां हैं उनमें भर्ती करे ।

श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने बजट खर्च न कर पाने पर सरकार को घेरते हुए कहा इतना भारी भरकम बजट होने के बावजूद सरकार खर्च करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती इच्छा शक्ति नहीं ईमानदार नियत नहीं है, 2025 – 26 में इस प्रदेश के विकास के लिए लोगों की आधारभूत जरूरत के लिए जो महत्वपूर्ण विभाग है उनके बजट का प्रतिशत जो खर्च हुआ उसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार की नियत इस प्रदेश के विकास के लिए , लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि- किसानों के लिए और युवाओं के रोजगार के लिए कितनी ईमानदार है ? कृषि विभाग का मात्र 57% बजट खर्च हो पाया, स्वास्थ्य विभाग का 58%, महिला कल्याण विभाग का 53% , बेसिक शिक्षा का 62%, ग्राम विकास का 36 प्रतिशत, और पशुधन विभाग का 60% खर्च हुआ और सरकार कहती है कि हम विकास कर रहे हैं और बड़ा बजट बना रहे हैं यह धोखा और ढोंग नहीं तो क्या है ?
आराधना मिश्रा मोना ने मनरेगा को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए कहा अपने मनरेगा को समाप्त करके आम आदमी, ग्रामीण क्षेत्र की लोगों के आय की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने का काम किया, नया कानून बना दिया है पहले मनरेगा में रोजगार मांगना कानूनी अधिकार था अब यह 125 दिन फिक्स कर दिया गया है, पहले केंद्र सरकार 90% अपना अंश देती थी राज्य सरकार का 10% अब यह अनुपात 60 और 40% हो गया, तो मनरेगा में राज्य के प्रस्तावित 40 % अंश का बजट में क्या प्रावधान है ? मनरेगा को कितना पैसा दिया जा रहा है ? सरकार ने कुछ नहीं बताया, उत्तर प्रदेश में वर्तमान वित्त वर्ष में मनरेगा के मजदूर की दैनिक मजदूरी 252 रुपए निर्धारित है, जो अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम है यह हमारे पड़ोसी राज हरियाणा में ₹400, कर्नाटक में 350 से कम । मनरेगा में पंचायत के अधिकारों को समाप्त कर दिया, अब ग्राम पंचायत मनरेगा के तहत अपनी कार्य योजना नहीं बन सकती, धारा – 4 में पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान से जोड़ने पर पंचायत कमजोर होगी, यह यूपी में कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली योजना थी,जिसको भाजपा ने बर्बाद कर दिया ।
श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने विकास के नाम पर सरकार की अपनी जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब यह डबल इंजन वाली सरकार हर क्षेत्र में विकास के नाम पर सिर्फ और सिर्फ निजीकरण कर रही है जो पहले चरण है पी.पी.पी.( पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) करके अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है, जो लोक कल्याण की भावना है उसे समाप्त कर रही है , भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने रेलवे, एयरपोर्ट के निजीकरण शुरू कर दिए, अब स्वास्थ्य विभाग भी इस दिशा में बढ़ रहा है पेज नंबर 8 पर 16 जिला मेडिकल कॉलेज स्थापना पी.पी.पी पर होगी, पेज नंबर 16 में PPP मॉडल से जेवर एयरपोर्ट चलेगा, पेज नंबर 26 में PPP मॉडल से वाराणसी में क्रिकेट स्टेडियम बनेगा, व्यावसायिक शिक्षा आई.टी.आई भी PPP मॉडल पर ।
आराधना मिश्रा मोना ने परिवहन विभाग को लेकर कहा कि संकल्प पत्र में 2000 नई बसों के संचालन बात हुई थी अब तक कितनी चलीं सरकारी नहीं बता पाई ? प्रत्येक जग्राम पंचायत में बस स्टाफ बनने थे ,अभी तक नहीं हो पाए । और जो 60 साल के ऊपर की महिलाओं को फ्री बस सेवा देने का वादा था वह सिर्फ वादा ही निकला ।
स्वास्थ्य विभाग अपने बजट का मंत्र 58% ही खर्च कर पाया और संख्या बाड़ी की जा रही है प्रदेश में संचालित दो AIIMS पर सरकार अपनी पीठ थपथपाती है, लेकिन रायबरेली एम्स जिसे कांग्रेस सरकार में स्थापित किया गया, वहां के लोग धरना दे रहे हैं डॉक्टर और संसाधनों की भारी कमी की वजह से। एम्स जो इलाज का बड़ा केंद्र था वह सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गया है, डबल इंजन सरकार है लेकिन एम्स को धन नहीं मिल रहा है, लोहिया संस्थान जहां रोजाना चार से पांच लोग आते हैं और मेडिकल कॉलेज जहां रोज अगल-बगल से जिलों से लगभग 15000 लोग आते हैं लेकिन सरकार नहीं बताती है कि नए जो मेडिकल कॉलेज बने उसमें कितने डॉक्टर और पैरामेडिकल भर्ती हुए? मेडिकल कॉलेज के नाम पर बिल्डिंग खड़ी करने को उपलब्धि नही कहते, उसके लिए सेवाभाव और ईमानदार नियत की जरूरत होती है जो उपरोक्त आकड़ों से स्पष्ट है कि योगी आदित्यनाथ सरकार के पास नही है ।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments