नई टिहरी। केंद्रीय संस्कृत विवि के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में आयोजित कार्यशाला में योग का लाभ जन-सामान्य तक पहुंचाने के सूत्रों पर मंथन किया गया। योग विशेषज्ञों ने कहा कि योग का महत्त्व लगातार बढ़ रहा है। एलोपैथी के साथ योग का समन्वय आवश्यक है। सतत चिकित्सा शिक्षा नामक इस कार्यशाला के समापन पर देश के योग विशेषज्ञों ने कहा कि योग को आधुनिक ढांचे में ढालकर समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाना होगा। समापन समारोह में प्रतिष्ठित योगाचार्य व पूर्व चेयरमैन ह्यूमन कॉन्शियसनेस डिपार्टमेंट मंगलौर विश्वविद्यालय के प्रो. के. कृष्ण शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अहम भाग योग को चिकित्सा क्षेत्र की मुख्य धारा में लाया जाना चाहिए। परिसर निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि योग विद्या का उपयोग लोगों के स्वास्थ्य व कार्यक्षमता वृद्धि में किया जाना चाहिए। समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और ज्ञान संगम से प्राप्त योग, अध्यात्म एवं चिकित्सा शिक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं को समाज तक पहुंचाने का आग्रह किया गया। कार्यशाला भारत के दस विवि एवं केंद्रीय संस्कृत विवि के 12 परिसरों से पहुंचे प्राध्यापकों ने योग एवं चिकित्सा के क्षेत्र में नई शिक्षण विधियों और आधुनिक शोधों पर व्यापक चर्चा की।
जन-सामान्य तक पहुंचाया जाए योग: शर्मा
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