Thursday, October 22, 2026
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बीन नदी पुल का 50 फीसदी निर्माण पूरा, फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य


ऋषिकेश। यमकेश्वर प्रखंड के डांडामंडल क्षेत्र के 82 गांवों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। बीन नदी पर निर्माणाधीन डबल लेन पुल का करीब 50 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल को फरवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गुरूवार को जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ ही गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और तय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पुल निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों से आगामी कार्यों की जानकारी ली। कहा कि पुल के पूरा होने से न केवल स्थानीय ग्रामीणों को सुविधा मिलेगी, बल्कि बैराज-चीला मार्ग पर आवागमन को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
पुल निर्माण की प्रगति और समयसीमा
बरसात में इस मार्ग पर नदी का तेज बहाव आवाजाही को प्रभावित करता है,पुल का निर्माण पूरा होने के बाद इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। लोक निर्माण विभाग दुगड्डा के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह ने बताया कि केंद्रीय सड़क निधि के अंतर्गत बीन नदी पर पुल का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना का कार्य अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था। पुल की कुल लंबाई 150 मीटर होगी और इसमें 50-50 मीटर के तीन स्पान बनाए जा रहे हैं। पुल का कैरिजवे 7.5 मीटर चौड़ा होगा, जबकि फुटपाथ सहित इसकी कुल चौड़ाई 12 मीटर निर्धारित की गई है। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी।
परियोजना का लगभग आधा कार्य पूरा हो चुका है। शेष निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पुल का निर्माण फरवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता साहब सिंह सैनी, अपर सहायक अभियंता शशि प्रकाश सहित पुलिस और वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
मरीजों और विद्यार्थियों को मिलेगी राहत
बीन नदी पर पुल का निर्माण पूरा होने से डांडामंडल क्षेत्र के गांवों की ऋषिकेश से कनेक्टिविटी मजबूत होगी। वर्तमान में नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थानीय लोगों को आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए ऋषिकेश ले जाने, विद्यार्थियों के कॉलेज पहुंचने और ग्रामीणों को जरूरी कार्यों के लिए आवाजाही करने में परेशानी होती है। पुल बनने से बरसात के दौरान संपर्क प्रभावित होने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही बैराज-चीला-हरिद्वार मार्ग पर आवागमन अधिक सुगम होगा। वैकल्पिक मार्ग की सुविधा बेहतर होने से लोगों के समय और दूरी की बचत होगी। क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की भी संभावना है। लंबे समय से बरसात के दौरान आवागमन की समस्या झेल रहे ग्रामीणों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नीलकंठ मंदिर के समीप पार्किंग का निरीक्षण
बीन नदी पुल के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने नीलकंठ मंदिर के समीप निर्माणाधीन बहुमंजिला पार्किंग का भी निरीक्षण किया। उन्होंने उपजिलाधिकारी चतर सिंह चौहान से परियोजना की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने निर्माण कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने और श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नीलकंठ मंदिर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए उन्होंने पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने और सुरक्षा के जरूरी प्रबंध करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
वन्यजीव सुरक्षा और रात्रिकालीन गश्त की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन से पार्क क्षेत्र में रात्रिकालीन आवाजाही, वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल सफारी के संचालन की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने लक्ष्मणझूला थाना पुलिस से रात्रिकालीन गश्त की स्थिति के संबंध में जानकारी लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने पुलिस और वन विभाग के बीच समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने वन क्षेत्र से लगे गांवों में लोगों को हो रही समस्याओं और पर्यटन गतिविधियों से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।

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