देहरादून। शिक्षा अब सिर्फ किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रही। विद्यार्थियों में सवाल पूछने, समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान खोजने की शोध क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ विश्व शिक्षक दिवस पर निम्बस स्कूल ऑफ एजुकेशन, झाझरा में सोमवार को ‘एक्शन रिसर्च’ (क्रियात्मक अनुसंधान) पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों ने शोध की बारीकियां सीखने के साथ शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर मंथन किया।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं प्रशिक्षक विपिन चौहान ने विद्यार्थियों को एक्शन रिसर्च की मूल अवधारणा, उद्देश्य, प्रक्रिया और विभिन्न प्रकारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिक्षण के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को पहचानकर उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना ही क्रियात्मक अनुसंधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्यशाला की सहायिका उर्वशी ने उदाहरणों और गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को विषय की जटिल अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया। कार्यशाला में पेडागॉजी और विभिन्न शिक्षण विधियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। संवादात्मक सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने शोध से जुड़े सवालों की झड़ी लगा दी। प्रशिक्षकों ने सवालों के जवाब देते हुए विद्यार्थियों को शोध की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझाया। इससे पूरे सत्र में विद्यार्थियों की उत्सुकता और सक्रिय भागीदारी बनी रही। बीए की छात्रा नव्या सिंह, उत्कर्ष, बीएड प्रशिक्षणार्थी कीर्ति बिष्ट, अमन शाह, लक्ष्मण मेहर, रक्षा, आशिमा और काजल समेत बीकॉम, बीसीए, बीबीए और एमबीए के विद्यार्थियों ने कार्यशाला में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शोध से जुड़े प्रश्नों के समाधान मिलने पर विद्यार्थियों ने इसे ज्ञानवर्धक और उपयोगी अनुभव बताया।
कार्यक्रम में संस्थान के डॉ. विजय सीमा, डॉ. सीमा वशिष्ठ, डॉ. नीलम नेगी, डॉ. अभिनव पोखरियाल, नवीन राणा, नेहा डंगवाल, धनवीर सैनी, इशिका अग्रवाल और रणदीप कौर समेत अन्य शिक्षकों ने कार्यशाला में सहभागिता की।इससे पहले मुख्य प्रशिक्षक विपिन चौहान और सहायिका उर्वशी का संस्थान की ओर से एकेडमिक निदेशक डॉ. वीपी विश्वकर्मा, डॉ. नीलम रावत, डॉ. सीमा पाण्डेय और डॉ. संजय गैरोला ने स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिनव पोखरियाल और डॉ. विजय सीमा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में सैजल लखरवाल, नवीन राणा, तनु धीमान और श्वेता रानी ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। समापन पर संस्थान अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार तिवारी ने कार्यशाला की सफलता पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शोध आधारित सोच विद्यार्थियों को केवल बेहतर विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान खोजने वाला जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने में भी मदद करती है। एकेडमिक निदेशक ने अतिथियों, प्रशिक्षकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
विश्व शिक्षक दिवस पर निम्बस स्कूल ऑफ एजुकेशन में विशेष कार्यशाला
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