Friday, September 11, 2026
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जन्म-मृत्यु पंजीकरण में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनिवार्यता का विरोध


विकासनगर। दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु पंजीकरण के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य किए जाने के विरोध में क्षेत्रवासियों ने गुरुवार को तहसील परिसर चकराता में सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। पूर्व प्रधान गोपाल उर्फ गोपी के नेतृत्व में धरने पर बैठे ग्रामीणों ने पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की। पूर्व प्रधान गोपाल ने कहा कि दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अनिवार्यता से पर्वतीय क्षेत्र के ग्रामीणों को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। चकराता, कालसी और त्यूणी तहसील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गांव दूरस्थ और दुर्गम हैं। ऐसे में ग्रामीणों को न्यायालय की प्रक्रिया के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे उनका समय और धन दोनों खर्च होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि न्यायालय की प्रक्रिया के साथ अधिवक्ता की फीस, शपथपत्र तैयार कराने का खर्च, यात्रा व्यय और समय का अतिरिक्त बोझ गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ेगा। दूरस्थ गांवों से तहसील अथवा जिला मुख्यालय तक पहुंचने में ही कई घंटे लग जाते हैं। ऐसे में न्यायालय के चक्कर लगाना ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। उन्होंने कहा कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र आज के समय में महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।
बच्चों के दाखिले पर पड़ रहा प्रभाव
जन्म प्रमाणपत्र के अभाव में विद्यालय में प्रवेश, सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े कार्य प्रभावित हो सकते हैं। वहीं मृत्यु प्रमाणपत्र के अभाव में पेंशन, बैंक, बीमा और उत्तराधिकार संबंधी कार्यों में दिक्कत आती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव या संसाधनों की कमी के कारण कई बार समय पर पंजीकरण नहीं हो पाता। क्षेत्रवासियों ने मुख्य सचिव से मांग की कि दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु पंजीकरण के मामलों में आदेश जारी करने का अधिकार न्यायालय के स्थान पर पुनः उप जिलाधिकारी को दिया जाए। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर राहत मिलेगी और न्यायालयों पर भी अनावश्यक मामलों का बोझ कम होगा। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो क्षेत्रवासी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होंगे। धरने में कमल रावत, सालक राम जोशी, चंदन रावत, भाव सिंह रावत, खुशीराम जोशी, राजेंद्र जोशी, टीकम रावत, चमन वर्मा, नंदलाल, प्रभु सिंह, प्रेमदास, रमेश, सुरेश, राजू, संदीप जोशी, मोहर सिंह चौहान समेत अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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