2014 से 2017 के बीच हुआ घोटाला! …तो पूर्व अधिकारियों की शह पर कंपनी ने किया करोड़ों का खेल

Manthan India
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पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन आफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) से करोड़ों रुपये का टेंडर लेकर नुकसान पहुंचाने के लिए कंपनियां ही नहीं, बल्कि पिटकुल के कुछ पूर्व अधिकारी भी जिम्मेदार हैं।

पिटकुल अधिकारियों व कंपनी के ठेकेदारों ने मिलकर इस टेंडर में करोड़ों रुपये का खेल कर दिया। विद्युत सब स्टेशनों के निर्माण व उपकरणों की सप्लाई के लिए जारी किए गए टेंडर पहले से ही विवादित थे, लेकिन पिटकुल के कुछ अधिकारी इस पर लीपापोती करते रहे। सुराज दल के अध्यक्ष रमेश जोशी की ओर से जब इस मामले में सूचना का अधिकार के तहत सूचना मांगी गई तो खुद को बचाने के लिए एकाएक मुकदमा दर्ज करवा दिया गया।

पिटकुल की ओर से 18 मई 2016 को निविदा आमंत्रित की थी। मिलीभगत करके ठेकेदार अवधेश कुमार मार्फत मैसर्स इशान एंटरप्राइजेज -7 ए एजेंसी बोस रोड, कोलकाता बंगाल, राजेंद्र मिमानी स्वामी मैसर्स इशान एंटरप्राइजेज कुचिल सरकार लेन हावडा, रवि शंकर पांडय मार्फत सीटीआर मैन्युफेक्चरिंग कंपनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड नागर रोड पुणे, गिरीश चैतन्य आर प्रबंध निदेशक मैसर्स वैन्सन इलेक्ट्रिक प्राइवेट लिमिटेड पिनिया इंडस्ट्रियल एरिया, बेंग्लुरु, सुमार ब्रह्म भट्ट मार्फत मैसर्स एचएससी इन्फ्रा प्रोजेक्टस, सिगमा बन कारपोरेट-कारपोरेट हाउस नंबर-6 सिंद्धू भवन रोड बोडकदेव, अहमदाबाद, नरेंद्र ए कोडे मार्फत मैसर्स सीगनेट प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड, पीटी गेरा सेंटर, तीसरा तला घुले पाटिल रोड, बुन्द गार्डन, पूणे. महाराष्ट्र को ही शामिल किया गया।

शर्तों के अनुसार, कार्य वर्ष 2018 में पूरा किया जाना था, लेकिन ठेकेदारों ने समय पर काम पूरा नहीं किया। पिटकुल ने ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के बाद पहले 26 जुलाई 2018 और इसके बाद दिसंबर 2019 को टेंडर बिना पेनाल्टी समय विस्तार किया गया।

इसके बाद मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा और उच्च न्यायालय के आदेशानुसार कमेटी का गठन किया, जिसमें पिटकुल के उच्च अधिकारियों को शामिल किया गया। कमेटी ने निर्णय लिया कि विभाग की ओर से तय धनराशि से अधिक कंपनियों को नहीं दिया जाना चाहिए।

यह रिपोर्ट कुछ अधिकारियों ने हस्तांतरित कर दी, लेकिन एक अधिकारी ने फर्म की पैरवी की और निर्णय कंपनी के पक्ष में करने को अड़ा रहा। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से इस अधिकारी के बेटे के खाते में भी कुछ धनराशि डाली गई है।

समझौता समिति भी बनी, लेकिन अड़ा रहा अधिकारी

मई 2022 के दौरान शासन के आदेशों पर समझौता समिति का गठन पिटकुल के पूर्व अधिकारी ने किया, लेकिन यहां भी कोई निर्णय नहीं निकल पाया। इसके बाद जब कंपनी की जांच की गई तो अक्टूबर 2022 में टेंडर में पूलिंग किए जाने की पुष्टि हुई। पिटकुल की ओर से फर्म की दो करोड़ 66 लाख रुपये की बैंक गारंटी जब्त करने और तीनों फर्म को काली सूची में डालने के लिए फर्मों को नोटिस जारी किए गए।

पिटकुल में वर्ष 2014 से 2017 के बीच हुए टेंडर में घोटाला!

पिटकुल में टेंडर में बिड पूलिंग के उजागर होने से प्रदेश में हुए करोड़ों के कार्यों में गड़बडी की बू आने लगी है। पिटकुल के अधिकारियों की मिलीभगत से निजी कंपनियों ने कई खेल किए। वर्ष 2014 से 2017 के बीच कई कार्यों में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनों के उच्चीकरण आदि के करोड़ों के कार्यों में गड़बड़झाले को लेकर पिटकुल प्रबंधन भी गंभीर हो गया है। बिड पूलिंग में तीन कंपनियों के छह ठेकेदारों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने के बाद पिटकुल प्रबंधन अभी ऐसे कई और ठेकेदारों को घसीटने की तैयारी में है। साथ ही वर्ष 2014 से 2017 के बीच किए गए टेंडरों की भी जांच की जा रही है।

पिटकुल में भ्रष्टाचार के विरुद्ध देर से ही सही कार्रवाई शुरू हो गई है। पिटकुल प्रबंधन की ओर से पूर्व में हुई गड़बड़ियों को सुधारने और दोषियों पर कार्रवाई का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में स्थित विद्युत सब स्टेशन और ट्रांसमिशन तंत्र से संबंधित कार्यों के लिए समय-समय पर निकाले गए टेंडर और निजी कंपनियां सवालों के घेरे में हैं।

निगम के ही अधिकारियों ने निजी कंपनियों के साथ मिलीभगत कर धनराशि ठिकाने लगाने की प्रबल आशंका है। पिटकुल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने अगले कुछ दिन के भीतर निजी ठेकेदारों के विरुद्ध अन्य गड़बड़ियों में मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है। साथ ही संबंधित विभागीय कार्मिकों की भी जांच हो सकती है।

पुराने कार्यों की होगी जांच

पिटकुल प्रबंधन की ओर से पिछले कुछ सालों में कराए गए बड़े स्तर के कार्यों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। प्रबंधन वर्ष 2016 में पूर्ण हुए 400 केवी श्रीनगर गढ़वाल, वर्ष 2018 में पूर्ण हुए 220/33 केवी जीआइएस हर्रावाला, वर्ष 2018 में पूर्ण हुए 220/33 केवी पिरान कलियर और 2016 में पूर्ण हुए 132केवी श्रीनगर सब स्टेशन के स्विचयार्ड पोर्शन के कार्य की जांच कराएगा।उक्त करोड़ों के कार्यों में टेंडर की पारदर्शिता और गुणवत्ता की जांच की जाएगी। इसके अलावा पिटकुल की ओर से आगामी एक माह के भीतर छोटे-बड़े कुल 15 टेंडर निकाले जाएंगे। जिनकी टेंडरिंग प्रक्रिया भी कड़ी निगरानी में होगी।

भ्रष्टाचार करने वालों को पहुंचाएंगे सलाखों के पीछे

पिटकुल में भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रबंध ने सख्त रवैया अपनाया है। प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने कार्मिकों को सख्त हिदायत दी है। साथ ही गड़बड़ी करने वाली निजी कंपनियों व ठेकेदारों के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई करने का दावा किया है। गड़बड़ी करने वाली कंपनियों को ब्लैक लिस्ट करने की भी तैयारी है।

पिटकुल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने मीडिया से बातचीत कर कार्रवाई का दावा किया। कहा कि मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड की परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए पिटकुल में भी भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि कुछ और निजी कंपनियों और ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद प्राथमिक जांच के आधार पर पिटकुल प्रबंधन संबंधितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा रहा है।साथ ही यदि भ्रष्टाचार में निगम के किसी भी कार्मिक की संलिप्तता पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निगम के तमाम कार्मिकों को सख्त हिदायत दी है कि सभी कार्य पारदर्शिता के साथ किए जाएं। उत्तराखंड के विकास में पिटकुल की भूमिका को सक्रिय रूप से धरातल पर उतारने का प्रयास किया जा रहा है।

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