उत्तराखंड की जेलों में बंदियों का सर्वाधिक दबाव, क्षमता से दोगुने बंदी

Manthan India
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देश के मुकाबले उत्तराखंड की जेलों में बंदियों का सर्वाधिक दबाव है। यहां जेलों में क्षमता से 193 फीसदी अधिक बंदी रखे गए हैं। यह दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

राज्यभर में एक सेंट्रल, सात जिला, दो उप जिला और खुली जेल हैं। हाल में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, इन जेलों में 3741 बंदी ही रखे जा सकते हैं, लेकिन 6921 बंदी रखे गए हैं। एनसीआरबी ने 31 दिसंबर 2021 के रिकॉर्ड पर यह आंकड़े जारी किए। लेकिन, अब यहां की जेलों में बंदियों की मौजूदा संख्या 7238 तक पहुंच गई है। इस साल आखिर तक आंकड़ा जेलों की क्षमता का 200 फीसदी तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि जेलों में प्रभावी निगरानी न होने के साथ अव्यवस्था की स्थिति रहती है और जेल प्रशासन के पसीने छूट जाते हैं।

सबसे ज्यादा नशा तस्कर
उत्तराखंड में नशा तस्करी चरम पर है। नशा तस्करी में गिरफ्तार बंदियों को आसानी से जमानत भी नहीं मिल पाती है। यही वजह है कि उत्तराखंड में बंद बंदियों में सबसे ज्यादा संख्या नशा तस्करों की है। सेंट्रल जेल सितारगंज में 552 बंदियों की क्षमता है, लेकिन 10 अक्तूबर तक यहां 619 बंदी हो चुके थे। उप कारागार हल्द्वानी की क्षमता 535 है, लेकिन 10 अक्तूबर तक 1907 बंदी हो गए। उप कारागार रुड़की की क्षमता 244 है, लेकिन उक्त अवधि में 563 बंदी रखे जा चुके हैं।

जेल क्षमता स्थिति
देहरादून 580 1554
हरिद्वार 888 1352
टिहरी 150 259
चमोली 169 137
पौड़ी 150 168
नैनीताल 71 209
अल्मोड़ा 102 433

उप कारागारों में तीन गुना बंदी
उत्तराखंड में दो उप कारागार हैं। इनमें से एक नैनीताल के हल्द्वानी और दूसरा हरिद्वार के रुड़की में है। दोनों ही उप कारागारों में कई कुख्यात बंदी रखे जाते हैं। इन दोनों की क्षमता 779 बंदियों की है, लेकिन यहां 2470 बंदी रखे गए हैं। यानी क्षमता से तीन गुना से ज्यादा बंदी इन दोनों जेलों में हैं।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के तहत उत्तराखंड के बाद यूपी की जेलों की क्षमता से 184 फीसदी और दिल्ली की जेलों में 182 फीसदी बंदी हैं। आईजी जेल विमला गुंज्याल ने बताया कि उप कारागारों और जिला जेलों में बंदियों की संख्या ज्यादा है। अभी सात जिलों में जिला कारागार हैं। सभी जिलों में जिला कारागार बनाने पर काम चल रहा है। हल्द्वानी जेल में बैरक बढ़ाए जा रहे हैं। पिथौरागढ़ जेल का निर्माण काफी हद तक पूरा हो गया है। यूएसनगर में जेल भवन का निर्माण शुरू हो गया है।

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