चमोली के रैणी गांव जैसी आपदा की आहट इस गांव में तो नहीं? खारबगड़ में टनल के ऊपर भू-धंसाव से गांव के लोगों में दहशत

Manthan India
0 0
Read Time:4 Minute, 32 Second

आपदा के लिहाज से उत्तराखंड की गिनती संवदेनशील राज्यों में होती है। चमोली जिले के रैणी गांव में हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट की टनल में मलबा-पानी से आई आपदा ने ग्रामीणों को गहरे जख्म दिए थे। आपदा से कई ग्रामीणों की जान गई तो कई लोग अभी भी लापता हैं। ऐसा ही मामला अब बागेश्वर जिले के कपकोट में सामने आ रहा है। खारबगड़ में उत्तर भारत हाईड्रोपावर के टनल के ऊपर भू-धंसाव से ग्रामीण दशहत में हैं।

लेकिन टनल को इससे कोई खतरा नहीं है। पावर कंपनी में नौकरी नहीं मिलने से गांव के अधिकांश लोग नाराज दिखे। उनका कहना है कि हर बारिश में परेशानी हम झेल रहे हैं, लेकिन रोजगार बाहर के लोगों को दिया जा रहा है। ग्रामीणों की आड़ में कई लोग मालामाल भी हो गए हैं।

टनल के नीचे रेवती नदी है वहां प्रशासन हर बार रेता बजरी की निविदा कराता है, जो उनके लिए खतरा पैदा कर रहा है।  खाईबगड़ क्षेत्र की पड़ताल की गई। गांव में करीब 60 परिवार रहते हैं, जो शनिवार को भू-धंसाव के कारण दहशत में दिखे। कुछ ग्रामीणों से बात करने पर उन्होंने बताया कि टनल से पानी रिसने की दिक्कत हर साल बारिश में आती है।

ऊपर टनल नीचे रेवती नदी बहती है। इससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है, रेवती नदी में खनन का भी किया जाता है। बारिश के दिनों में कभी वह भराड़ी आते हैं तो पानी के कारण शाम को घर नहीं जा पाते हैं। इसके बाद टीम रीठाबगड़ से 200 मीटर आगे पहुंची। जमुखाखाल के पास कुछ मात्रा में लगातार टनल के नीचे से पानी निकल रहा था।

ग्रामीणों ने बताया कि यदि टनल टूटी तो परमटी, गांसू, रीठाबगड़, भानी, तिमलाबगड़, चीराबगड़, भराड़ी, खाईबगड़, कपकोट तक के लिए खतरा बन सकती  है।

2007 में जब यह बन रहा था तब हमने विरोध किया, तब हमें राजनेताओं ने बरगलाया हम मान गए। हर ग्रामीण को रोजगार देने की बात की गई थी। बेटी की शादी में एक लाख देने की बात थी। सब बेइमानी साबित हो रही है। भू-धंसाव ने उन्हें दहशत में डाल दिया है।दयाल बड़ती, निवासी खारबगड़। 

चार साल पहले हमारा मकान भूस्खलन की चपेट में आ गया था। मुआवजा लेने के लिए उनकी चप्पले तक घिस गई, लेकिन नहीं मिला। रोजगार के लिए गांव की समिति बनी थीं। एक युवक कंपनी में था, हादसे में मौत के बाद भी परिजनों को रोजगार तक नहीं मिला।
दिनेश बड़ती, निवासी खारबगड़। 

खारबगड़ के भू-धंसाव के साथ ही टूट-फूट हुई है। पूर्व में भी एक बार भू-वैज्ञानिक की टीम यहां आ चुकी है। तब उन्हें बात तक नहीं करने दी गई। तब कहा था कि वहां हर परिवार को रोजगार देंगे। रोजगार तो मिला नहीं गांव खाली करने की नौबत आ गई है।
गोविंद सिंह, निवासी खारबगड़। 

टनल बनने के एक साल में ही रिसाव करने लग गया था। तब भी उन्होंने इसका विरोध किया। तब कंपनी ने कहा था कि इससे कोई नुकसान नहीं होगा। यदि होगा तो इसकी भरपाई की जाएगी। स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा, लेकिन यहां सारे मानक धरे के धरे हैं।
बिशन सिंह निवासी खारबगड़। 

खारबगड़ में भू-धंसाव उनके टनल की वजह से नहीं हुआ है। इससे न गांव को खतरा है और न कंपनी को। एक दो दिन में भू-वैज्ञानिकों की टीम फिर सर्वे करा लिया जाएगा। शादी के लिए कंपनी एक लाख का चेक प्रत्येक परिवार को दे रही है।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सीएम धामी बोले- टूरिज्म प्रोजेक्टों में तेजी लाने को बनेगी राज्य स्तरीय कमेटी, रखा ये लक्ष्य

उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र में आने वाले प्रोजेक्टों में तेजी लाने के लिए राज्य स्तरीय कमेटी का गठन होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने  मंगलवार को इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच साल में प्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में सर्वोपरि राज्य बनाया जाएगा। राजपुर रोड स्थित […]

You May Like

Subscribe US Now